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एक शहर में रहना, दूसरे शहर में किराया देना: HRA और होम लोन टैक्स नियम कैसे लागू होते हैं?

एक शहर में रहना
एक शहर में रहना

एक शहर में रहना, दूसरे शहर में किराया देना: आज के समय में वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर के चलते लोगों की रहन-सहन की व्यवस्था काफी बदल गई है। कई कर्मचारी एक से अधिक शहरों में रहते हैं या काम के कारण उन्हें अलग-अलग जगहों पर घर किराए पर लेना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और होम लोन पर टैक्स छूट का लाभ कैसे मिलेगा।

इसी तरह का एक सवाल Ask Wallet Wise पहल के तहत पूछा गया, जिसमें एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी वास्तविक जीवन की स्थिति को लेकर कंफ्यूज है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

सवाल क्या है?

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेंगलुरु की एक कंपनी में काम करता है। उसे महीने में 15 दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति है।

  • वह दो घरों का किराया दे रहा है
    • एक घर गुजरात में (जहां उसका परिवार रहता है)
    • दूसरा घर बेंगलुरु में (जहां वह महीने में लगभग 15 दिन रहता है)
  • उसे सालाना लगभग ₹8 लाख HRA मिलता है
  • वह गुजरात के दो अलग-अलग शहरों में दो फ्लैट खरीदने की योजना बना रहा है
  • दोनों फ्लैट किराए पर दिए जाएंगे, जिनसे ₹8,000 प्रति माह प्रति फ्लैट किराया मिलने की उम्मीद है

उसका सवाल है:
क्या वह दोनों किराए के घरों पर HRA क्लेम कर सकता है? और क्या दोनों होम लोन पर टैक्स बेनिफिट मिलेगा?

HRA (House Rent Allowance) से जुड़े नियम

HRA की छूट केवल पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में मिलती है। यह छूट उस घर के लिए मिलती है जिसमें कर्मचारी खुद रहता है और जिसके लिए वह किराया देता है

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HRA की छूट कैसे तय होती है?

HRA की छूट निम्न तीन में से जो सबसे कम हो, उतनी ही मिलती है:

  1. बेसिक सैलरी का
    • 50% (मेट्रो शहरों के लिए)
    • 40% (नॉन-मेट्रो शहरों के लिए)
  2. वास्तविक HRA जो नियोक्ता से मिला हो
  3. किराया – बेसिक सैलरी का 10%

क्या दो घरों पर HRA मिल सकता है?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(13A) के अनुसार:

  • HRA की छूट केवल एक ही घर के लिए ली जा सकती है
  • कानून में यह साफ नहीं लिखा कि वह घर कर्मचारी के “कार्यस्थल” वाले शहर में ही होना चाहिए

इसलिए विशेषज्ञों की राय में,
आप दोनों में से किसी एक घर (गुजरात या बेंगलुरु) के लिए ही HRA क्लेम कर सकते हैं, दोनों के लिए नहीं।

वर्क फ्रॉम होम की वजह से दो घर किराए पर लेने की स्थिति कानून बनाते समय नहीं सोची गई थी, इसलिए फिलहाल नियम यही हैं।

होम लोन पर टैक्स बेनिफिट के नियम

अब बात करते हैं गुजरात में खरीदे जाने वाले दोनों फ्लैट्स और उन पर लिए गए होम लोन की।

अगर आप Old Tax Regime चुनते हैं

  • दोनों फ्लैट लेट-आउट प्रॉपर्टी माने जाएंगे
  • आप दोनों होम लोन पर दिए गए पूरे ब्याज (Interest) को क्लेम कर सकते हैं
  • लेकिन:
    • हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान (Loss) को
      • अन्य इनकम से अधिकतम ₹2 लाख प्रति वर्ष तक ही एडजस्ट किया जा सकता है
    • बाकी नुकसान को
      • अगले 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है
      • और भविष्य में सिर्फ हाउस प्रॉपर्टी इनकम से ही एडजस्ट किया जाएगा

अगर आप New Tax Regime चुनते हैं

  • नई टैक्स व्यवस्था में नियम काफी सख्त हैं
  • इसमें:
    • हाउस प्रॉपर्टी का नुकसान
      • न तो दूसरी इनकम से सेट-ऑफ हो सकता है
      • न ही अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है
  • आप:
    • दोनों फ्लैट्स से मिलने वाले कुल किराए के बराबर ही
      • होम लोन ब्याज की छूट ले पाएंगे
  • Self-occupied property पर:
    • नई टैक्स व्यवस्था में
      • होम लोन ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती

आसान शब्दों में निष्कर्ष

  • HRA का लाभ
    • केवल एक ही किराए के घर पर मिलेगा
    • चाहे आप दो शहरों में रह रहे हों
  • होम लोन ब्याज की छूट (Old Tax Regime में)
    • दोनों प्रॉपर्टी पर मिलेगी
    • लेकिन सालाना ₹2 लाख तक ही नुकसान सेट-ऑफ होगा
  • New Tax Regime में
    • हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान का फायदा बहुत सीमित है
    • और Self-occupied प्रॉपर्टी पर ब्याज की छूट नहीं मिलती

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अंतिम सलाह

अगर आपकी इनकम ज्यादा है, HRA मिलता है और आपने होम लोन लिया हुआ है, तो Old Tax Regime आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, सही फैसला लेने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट से अपनी पूरी स्थिति के अनुसार सलाह जरूर लें।

आज के बदलते वर्क कल्चर में टैक्स नियमों को समझना जरूरी है, ताकि आप कानूनी रूप से अधिकतम टैक्स बचत कर सकें।

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